कृषि कानूनों पर पीएम की घोषणा को राहुल गांधी ने बताया – अन्याय के खिलाफ जीत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि देश के अन्नदाता ने ‘सत्याग्रह’ के जरिए ‘अहंकार का सिर झुका दिया है।’ और कृषि उन्होने कानूनों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को ‘अन्याय के खिलाफ जीत’ बताया। उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज सुबह राष्ट्र के नाम एक संबोधन में घोषणा के बाद आई है कि जिसमे सरकार ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया है, जो पिछले एक साल से किसानों के विरोध के केंद्र में थे।

राहुल गांधी ने हिंदी में एक ट्वीट में कहा, ”देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया। अन्याय के खिलाफ़ ये जीत मुबारक हो! जय हिंद, जय हिंद का किसान!”  साथ ही उन्होने अपना एक पुराना वीडियो भी शेयर किया। 14 जनवरी, 2021 को ट्विटर पर शेयर किए गए  राहुल इस वीडियो में कह रहे है कि ‘किसान जो कर रहे हैं, उसपर मुझे बहुत गर्व है। हम उनके साथ खड़े हैं और खड़े रहेंगे। मैंने ये मुद्दा पंजाब में एक यात्रा के दौरान उठाया था और हम ये करते रहेंगे।’

वहीं प्रियंका गांधी ने इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि 600 से अधिक किसानों की शहादत 350 से अधिक दिन का संघर्ष, प्रधानमंत्री जी आपके मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार डाला, आपको कोई परवाह नहीं थी। आपकी पार्टी के नेताओं ने किसानों का अपमान करते हुए उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, गुंडे, उपद्रवी कहा, आपने खुद आंदोलनजीवी बोला। उन पर लाठियां बरसाईं, उन्हें गिरफ़्तार किया। अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी कि यह देश किसानों ने बनाया है। यह देश किसानों का है, किसान ही इस देश का सच्चा रखवाला है और कोई सरकार किसानों के हित को कुचलकर इस देश को नहीं चला सकती। इसके बाद प्रियंका ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आपकी नियत और आपके बदलते हुए रुख़ पर विश्वास करना मुश्किल है। किसान की सदैव जय होगी। जय जवान, जय किसान, जय भारत।

इसके अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अमीरों की भाजपा ने भूमिअधिग्रहण व काले क़ानूनों से ग़रीबों-किसानों को ठगना चाहा। कील लगाई, बाल खींचते कार्टून बनाए, जीप चढ़ाई लेकिन सपा की पूर्वांचल की विजय यात्रा के जन समर्थन से डरकर काले-क़ानून वापस ले ही लिए। भाजपा बताए सैंकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सज़ा कब मिलेगी।

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