अमित शाह के खिलाफ आई तमिलनाडु बीजेपी, बोली – हिंदी थोपने की अनुमति नहीं देंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने मंगलवार को कहा कि वह राज्य पर हिंदी थोपने की अनुमति नहीं देंगे। बता दें कि अमित शाह ने 6 अप्रैल को कहा था कि सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों में कक्षा 10 तक हिंदी अनिवार्य कर दी जाएगी।

अन्नामलिया ने मंगलवार को चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “अगर हमें काम, शिक्षा या अन्य उद्देश्यों की आवश्यकता है, तो हम हिंदी सीख सकते हैं, लेकिन इसे थोपा नहीं जा सकता।” उन्होंने कहा कि वह खुद भाषा नहीं बोलते हैं और ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि राज्य में किसी को भारतीय होने के नाते अपनी राष्ट्रीयता साबित करने के लिए हिंदी बोलनी पड़े।

पिछले हफ्ते नई दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक में शाह ने कहा था कि “अब समय आ गया है कि राजभाषा को देश की एकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।” जबकि भारत की कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है, हिंदी देश की आधिकारिक भाषा है।

मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्नामलाई ने कांग्रेस पर 40 से अधिक वर्षों से हिंदी भाषा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी को वैकल्पिक भाषा बनाए जाने के बाद ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे को मंजूरी दी।

भाजपा नेता ने सिफारिश की कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर दसवीं कक्षा तक तमिल को अनिवार्य भाषा बनाने के लिए कहना चाहिए और राज्य सरकार इसके लिए लागत वहन करेगी। उन्होंने कहा, तमिल को संपर्क भाषा बनाने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए।

इस बीच, शाह ने 6 अप्रैल को हिंदी को “भारत की भाषा” के रूप में वर्णित किया था और कहा था कि इसका उपयोग विभिन्न राज्यों के नागरिकों द्वारा एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि स्थानीय भाषाओं के लिए।

कई विपक्षी नेताओं ने शाह की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि वे देश के किसी भी हिस्से में हिंदी थोपने के खिलाफ है।

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