UAE राजकुमारी के आतं’कवादी बताने पर बोले सुधीर चौधरी – ‘माय नेम इज सुधीर चौधरी, आई एम नोट…..

ज़ी न्यूज़ के एंकर सुधीर चौधरी इन दिनों यूएई की यात्रा पर है। उनकी यात्रा का यूएई में काफी विरोध भी हो रहा है। यूएई की राजकुमारी हेंड बिन्त फैसल अल कासिम खुद सुधीर चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। उन्होने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के अबू धाबी चैप्टर को भी सुधीर चौधरी को एक ‘प्रतिष्ठित’ वक्ता के रूप में आमंत्रित करने पर लताड़ लगाई है।

उन्होने सुधीर चौधरी को पहले आतं’कवादी बताया। उनका मानना है कि  सुधीर चौधरी भारत में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैला रहा है। जिससे मुसलमानों को न केवल हिंसा का शिकार होना पड़ रहा। बल्कि इस्लाम धर्म और पैगंबर साहब को भी अपमानित किया जा रहा है। उन्होने  सुधीर चौधरी के अबू धाबी में मंदिर दर्शन को भी पाखंड करार दिया।

ऐसे में अब चौधरी ने बयान जारी कर कहा है कि वह इस्लामोफ़ोब नहीं हैं।  अपना बयान साझा करते हुए उन्होने ट्वीट किया, ‘मेरा नाम सुधीर चौधरी है और मैं #इस्लामोफोब नहीं हूं। कुछ सांप्रदायिक ताकतें धर्म के नाम पर दूसरों को निशाना बनाने के लिए इस्लामोफोबिया के टैग का इस्तेमाल करती हैं। मेरा अबू धाबी का अनुभव इसका प्रमाण है।”

चौधरी ने अपने बयान में कहा, ”बहुत भारी मन से मैं आपके साथ हाल का एक अनुभव साझा कर रहा हूं. मुझे अबू धाबी में एक कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। घटना से कुछ ही दिन पहले, “राजकुमारी” और कुछ ब्लागरों के नेतृत्व में कुछ ब्लू-टिक हैंडल ने आयोजकों को धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे इस्लामोफोब और आतंकवादी कहा। उन्होंने अबू धाबी में मेरे खिलाफ सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर मुझे गालियां दी गईं और धमकी दी गई।”

उन्होंने आगे कहा, “फिर उन्होंने मेरे निमंत्रण के रद्द होने के बारे में फर्जी खबरें फैलाईं। भारत में कुछ मीडिया संगठनों ने बिना किसी तथ्य-जांच के अपने प्रचार और झूठ को बढ़ावा दिया। उन्होंने घोषणा की कि मुझे कार्यक्रम में बोलने से रोक दिया गया है।”

चौधरी ने कहा कि न केवल वह अबू धाबी गए, बल्कि उन्होंने अपने दिल की बात भी कही। “यह दबाव, डराने-धमकाने की रणनीति, जानलेवा ईमेल और समन्वित ट्रोलिंग के बावजूद है, जिसने अन्य मेहमानों और प्रायोजकों को भी नहीं बख्शा। उन्हें कहा गया कि वे कार्यक्रम से हट जाएं या मुझे बोलने से रोकें। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उन्हें सुरक्षा के इंतजाम करने पड़े।”

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