कोरोना काल में 10.01 फीसद बढ़े आत्मह’त्या के मामले, दिहाड़ी मजदूर और बिजनेसमेन खुदखुशी को हुए मजबूर

देश में कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन से न केवल लोगों के रोजगार छिन गए बल्कि लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। दरअसल, साल 2020 के दौरान देश मेंआत्महत्या के मामलों में 10.01 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। बिजनेसमेन  और दिहाड़ी मजदूर भी शामिल है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्मह’त्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे। अपनी जान लेने वालों में सबसे ज़्यादा तमिलनाडु के मज़दूर थे। फिर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात के मजदूरों की संख्या है।

देश में 2020 में आत्मह’त्या के कुल 153052 मामले सामने आये, यानी औसतन रोज 418 लोगों ने आत्मह’त्या की। इतना ही नहीं वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में आत्मह’त्या के मामलों में लगभग 10 फीसदी की वृद्धि देखी गई। एनसीआरबी के आंकड़े के मुताबिक देश में हुई कुल आत्मह’त्या में से इन पांच राज्यों में आत्मह’त्या के कुल मामलों के 50.1 फीसदी मामले सामने आये। हालांकि इस रिपोर्ट में कोरोना महामारी का जिक्र नहीं है।

रिपोर्ट में किसानों की आत्मह’त्या का भी जिक्र किया गया। साल 2019 में 5,957 किसानों ने आत्मह’त्या की थी। 2020 में इनकी संख्या कम होकर 5,579 पर आ गई। साल 2020 के दौरान 14,825 प्रोफेशनल, 12,526 विद्यार्थी, 15,652 बेरोजगार, 5,098 कृषि मजदूर, 1,457 रिटायर्ड और 20,543 अन्य लोग आत्मह’त्या की प्रवृत्ति के शिकार हुए।

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