मोदी सरकार ने सिख कर्मचारियों को हवाई अड्डों के भीतर कृपाण ले जाने की दी इजाजत

पीटीआई के अनुसार, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने सिख कर्मचारियों को हवाई अड्डे के परिसर के भीतर कृपाण ले जाने की अनुमति  है।इससे पहले केवल सिख यात्रियों को कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई थी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का कहना है कि कृपाण सिख धर्म में आस्था के पांच प्रतीकों में से एक है।

4 मार्च के आदेश में कहा गया था कि सिख यात्री कृपाण ले जा सकते हैं “बशर्ते ब्लेड की लंबाई 15.24 सेमी [6 इंच] से अधिक न हो; और कृपाण की कुल लंबाई 22.86 सेमी [9 इंच] से अधिक नहीं है।”

सोमवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कहा था कि उसके अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने 9 मार्च को नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर आदेश को वापस लेने की मांग की थी।

धामी ने अपने पत्र में कहा था कि हवाई अड्डे के परिसर से कृपाण पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सिखों की “धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” था। उन्होंने भारत सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा था कि प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता को संरक्षित रखा जाए।

द ट्रिब्यून के अनुसार, गैर-सरकारी संगठन अमृतसर विकास मंच के संदीप सिंह गुमतला ने पूछा कि अगर सिख यात्रियों को घरेलू उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति दी जाती है, तो सिख कर्मचारियों को कृपाण पहनने से कैसे रोका जा सकता है।

एएनआई के अनुसार, 12 मार्च को, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पिछले आदेश के लिए एक शुद्धिपत्र जारी किया, जिसमें विमानन क्षेत्र में सिख कर्मचारियों को हवाई अड्डे के परिसर में कृपाण ले जाने से रोक दिया गया था।

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