नवाब मलिक की रिमांड याचिका पर सुनवाई के दौरान ईडी ने माना – ‘मामला 55 लाख का नहीं बल्कि 5 लाख का है’

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की रिमांड याचिका पर गुरुवार को मुंबई की एक अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय, ने अपने पिछले आवेदन में “टाइपोग्राफिक” त्रुटि को स्वीकार किया, जिसके कारण 5 लाख रुपये को 55 लाख रुपये के रूप में लिखा गया। बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी केवरिष्ठ नेता मलिक, जो महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, को केंद्रीय एजेंसी ने 23 फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

23 फरवरी को मुंबई में एक विशेष मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट अदालत में सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पार्कर ने शहर के कुर्ला इलाके में एक संपत्ति का अधिग्रहण किया था और फिर इसे “अवैध रूप से” मलिक को लगभग 1 महीने में 50 लाख रु. बेच दिया था।

मलिक को 3 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया गया था। गुरुवार को, एजेंसी ने अदालत को बताया कि कुर्ला में “हड़पने” की जमीन के लिए 5 लाख रुपये नकद में दिए गए थे, न कि 55 लाख रुपये।

मलिक के वकील अमित देसाई ने कहा कि उनके मुवक्किल ने इस गलती के कारण छह दिन जेल में बिताए थे कि राशि 55 लाख रुपये थी।देसाई ने एजेंसी से कहा कि “अपना दिमाग लगाए” और अपना “होमवर्क” ठीक से करें। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार देसाई ने कहा, “जब आप लोगों की स्वतंत्रता के साथ काम कर रहे हों, तो उन्हें गिरफ्तार करने में जल्दबाजी न करें।”

सिंह ने हालांकि कहा कि भले ही राशि एक रुपये या 55,000 रुपये थी, इसकी जांच होनी चाहिए। प्रवर्तन निदेशालय के विशेष लोक अभियोजक हितेन वेनेगांवकर और सिंह ने मलिक की हिरासत बढ़ाने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि मलिक 25 से 28 फरवरी तक अस्पताल में भर्ती थे और उनका बयान दर्ज नहीं किया जा सका। न्यायाधीश आरके रोकाडे ने मलिक की हिरासत सात मार्च तक बढ़ा दी।

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