रवीश कुमार: महंगाई से नहीं महंगाई के सपोर्टर से ही बहस जीत कर दिखाइये

रवीश कुमार

कई महीने पहले हमने इस नई राजनीतिक श्रेणी की पहचान की थी जब लोगों को लगा था कि महंगाई से जनता त्रस्त है। यह तब का समय है जब सौ रुपये लीटर पेट्रोल हो रहा था। यूपी में कई लोग मिले जो औपचारिक रूप से दर्ज करा रहे थे कि महंगाई से दिक़्क़त नहीं है। महंगाई ज़रूरी है।

यूपी चुनाव के नतीजों ने महंगाई के सपोर्टरों की जीत साबित कर दी। यही वो सपोर्टर हैं जिनके रहते महंगाई का मुद्दा ध्वस्त हो गया।  आप इनका मज़ाक़ उड़ाएँगे लेकिन मेरी गुज़ारिश है कि उसके पहले इन्हें ध्यान से सुन लें। भारत की राजनीति के इतिहास में महंगाई के मुद्दे को ख़त्म करने वाले इन महंगाई के सपोर्टरों ने वो काम कर दिखाया जो कोई सरकार भी नहीं कर सकती।

महंगाई के समर्थकों की जीत का सम्मान कीजिए। हाँ ज़रूर दाम बढ़े तो उसे दर्ज कराइये लेकिन याद रखिए कि जनता के बीच दो वर्ग हैं। एक जो महंगाई से परेशान है और एक जो महंगाई का स्वागत करता है। समर्थन करता है। इस श्रेणी की पहचान के लिए और टीवी पर सम्मान के साथ लाने के लिए मुझे फ़ुल टंकी पेट्रोल फ़्री मिलना चाहिए!

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