पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, कतर, कुवैत, सऊदी, बहरीन और ओआईसी ने पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा प्रवक्ता की टिप्पणियों का कड़ा विरोध किया

पाकिस्तान ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के दो प्रवक्ताओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की निंदा करने के लिए भारतीय प्रभारी डी’एफ़ेयर को तलब किया। रविवार को ईरान, कुवैत और सऊदी अरब ने विवादित टिप्पणी के खिलाफ आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। वहीं कतर ने भारत सरकार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

पिछले हफ्ते बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। शर्मा को निलंबित कर दिया गया और जिंदल को रविवार को भाजपा ने निष्कासित कर दिया। कई पश्चिम एशियाई देशों ने शर्मा की टिप्पणी पर व्यापक असंतोष व्यक्त किया और भारतीय दूतों को तलब किया। भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करने वाले कई हैशटैग रविवार को अरब देशों में ट्विटर पर ट्रेंड करते देखे गए।

सोमवार को, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि उसने अपने प्रवक्ताओं पर भाजपा की देरी की कार्रवाई की निंदा की, इसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारत में इस्लामोफोबिया को रोकने और भारत सरकार से अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों की रक्षा करने का आग्रह करने के लिए भी कहा।

कतर के विदेश मंत्रालय ने भारत के राजदूत दीपक मित्तल को रविवार दोपहर को दो भाजपा प्रवक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणियों की व्याख्या करने के लिए तलब किया। विशेष रूप से, जब उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू कतर की आधिकारिक तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। कतर ने भारत सरकार से यह भी कहा कि अगर इस तरह की इस्लामोफोबिक टिप्पणियों को दंडित नहीं किया जाता है, तो इससे “और पूर्वाग्रह और हाशिए पर जा सकता है, जो हिंसा और नफरत का एक चक्र पैदा करेगा”।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने देश में भारतीय राजदूत सिबी जॉर्ज को भी तलब किया और एक आधिकारिक विरोध नोट सौंपा। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री के नोट ने कुवैत के शर्मा और जिंदल द्वारा दिए गए बयानों की “स्पष्ट अस्वीकृति और निंदा” व्यक्त की।

कुवैत ने हालांकि शर्मा को पार्टी से निलंबित करने के भाजपा के फैसले का स्वागत किया। तेहरान में, दक्षिण एशिया के महानिदेशक ने मामले पर ईरान का विरोध दर्ज कराने के लिए भारतीय राजदूत धामू गद्दाम को तलब किया। सऊदी अरब ने भी “इस्लामी धर्म के प्रतीकों के खिलाफ पूर्वाग्रह” को खारिज करने के लिए एक औपचारिक विरोध जारी किया।

इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने बीजेपी नेता के पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की है। तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने एक ट्वीट में लिखा है- हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वो ऐसे धर्मांध लोगों को इस्लाम का अपमान करने और मुसलमानों की भावना भड़काने से रोकें।

57 मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी ने एक ट्वीट में कहा कि संगठन के महासचिव भारत की सत्ताधारी पार्टी के एक अधिकारी की ओर से पैग़ंबर के बारे में किए गए अपमान की सख़्त निंदा करता है। ओआईसी ने लिखा, ये घटना भारत में इस्लाम के ख़िलाफ़ बढ़ती नफ़रत के बीच और ऐसे समय हुई है जब वहाँ मुसलमानों के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के बीच, वहाँ मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार क़दम उठाए जा रहे हैं और उनपर पाबंदियाँ लगाई जा रही हैं, जैसे भारत के कई राज्यों में हिजाब पर रोक लगाई जा रही है और मुसलमानों की संपत्तियों को तोड़ा जा रहा है।

नुपूर शर्मा की टिप्पणी पर बहरीन के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि वो भारत में बीजेपी के अपनी प्रवक्ता को निलंबित किए जाने का स्वागत करते हैं। साथ ही कहा है कि पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ ऐसे अपमान की घटनाओं की निंदा की जानी चाहिए जिनसे मुसलमानों की भावनाएँ आहत होती हैं और धार्मिक नफ़रत को भड़काया जाता है। सभी मज़हबों, प्रतीकों और शख़्सियतों का सम्मान करने तथा राजद्रोह व धार्मिक, सांप्रदायिक और नस्लवादी हिंसा का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों के महत्व पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।

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