गोदी मीडिया में केवल मोदी का चेहरा दिखता है, ये बात समझने में कांग्रेस को 8 साल लग गए : रवीश कुमार

इस पेज पर न जाने कितनी बार लिखा हूँ कि मीडिया इस देश के अर्जित लोकतंत्र की हत्या कर रहा है। इसका काम आवाज़ उठाना नहीं है। आवाज़ दबाना रह गया है।
कितनी ही बार लिखा कि विपक्ष को अपनी हर सभा और हर पदयात्रा में अख़बार हाथ में लेकर जनता को दिखाना चाहिए कि विपक्ष की ख़बरें ग़ायब हैं। जनता की ख़बरें ग़ायब हैं।

यह भी लिखा कि नेता के भाषण से पहले वीडियो चला कर दिखाना चाहिए कि ऐंकर क्या करते हैं। सरकार से सवाल नहीं करते और नफ़रत फैलाते हैं। यह भी लिखा है कि किसी ऐसे दिन के अख़बार को चुनावी सभा में मंच से फाड़ दें कि इसमें बीजेपी की पंद्रह चुनावी ख़बरें हैं और विपक्ष की एक ही ख़बर छपी या एक भी नहीं छपी है।
जब तक विपक्ष जनता के बीच मीडिया की हक़ीक़त नहीं बताएगा, गोदी मीडिया से नहीं लड़ेगा, तब तक विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों का कोई मतलब नहीं है। टाइम पास है।

कांग्रेस को इतनी सी बात समझने में आठ साल लग गए। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस वीडियो में बताया है कि कैसे अहमदाबाद के अंग्रेज़ी अख़बार में केवल प्रधानमंत्री का विज्ञापन भरा है। ख़बरें भी उन्हीं की हैं। राहुल की पदयात्रा की एक ख़बर नहीं है। है भी तो छोटी सी।
जहां चुनाव होते हैं वहाँ आचार संहिता लागू होने से पहले सरकारी विज्ञापनों से भर दिया जाता है। केवल मोदी का चेहरा दिखता है। जनता का पैसा फूंक दिया जाता है।

विज्ञापनों के दबाव में अख़बारों में जनता की समस्या छपनी बंद हो जाती है, जो आम तौर चुनाव से पहले छपती हैं। इस तरह सबका गला दबा कर एक आदमी को ही बोलने दिया जा रहा है। सुप्रिया ने जो काम किया है, उसे हर विपक्षी दल के प्रवक्ता को रोज़ करना चाहिए। सुप्रिया टीवी पत्रकार रही हैं तो उन्होंने यह काम सहजता से भी किया है।
राजनीति दल को यह सवाल चुनाव आयोग के पास हर दिन ले जाना चाहिए।पूरा हिसाब बताना चाहिए कि आज इस प्रदेश के दस अख़बारों में पचास खबरें चुनाव को लेकर छपी हैं।

केवल पाँच ख़बरें विपक्षी दलों की है। फिर ख़बरों के आकार की भी तुलना होनी चाहिए कि बीजेपी की ख़बर कितनी बड़ी छपती है और कांग्रेस या अन्य दलों की कितनी बड़ी। बल्कि विपक्षी दलों को अपने राजनीति पोस्टर में गोदी मीडिया को भी शामिल करना चाहिए ।
जो गोदी मीडिया से नहीं लड़ रहा, वह लोकतंत्र की लड़ाई नहीं लड़ रहा। क्योंकि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है। जनता की आवाज़ का हत्यारा।

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