सीएम बिप्लब देब पर भड़के बीजेपी विधायक – ‘त्रिपुरा में नहीं बचा लोकतंत्र’

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के दो विधायकों ने मंगलवार को 25 नवंबर को निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक हिं’सा के लिए मुख्यमंत्री बिप्लब देब और राज्य सरकार की आलोचना की। विधायकों, सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट, त्रिपुरा उच्च न्यायालय और यहां तक ​​​​कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी राजनीतिक हिं’सा को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

बर्मन ने कहा, “चूंकि हाल की हिं’सा से पार्टी के हितों को नुकसान होगा, इसलिए हमने रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय महासचिव [संगठन] बीएल संतोष और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इन सभी मामलों से अवगत करा दिया है।” बता दें कि त्रिपुरा में निकाय चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ गया है।

रविवार को तृणमूल कांग्रेस की नेता सुष्मिता देव ने आरोप लगाया था कि भाजपा समर्थकों ने त्रिपुरा में एक पुलिस स्टेशन के बाहर उन पर और पार्टी के अन्य सदस्यों पर हम’ला किया। उसी दिन, तृणमूल कांग्रेस नेता सायोनी घोष को ह’त्या के प्रयास, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और आपराधिक धम’की के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने आरोप लगाया कि घोष ने अगरतला में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब की रैली में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को कुचलने की कोशिश की थी। घोष को एक दिन बाद जमानत दे दी गई। पिछले हफ्ते खोवई जिले में दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें दो पुलिसकर्मियों समेत 19 लोग घाय’ल हो गए थे।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर एक अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करते हुए त्रिपुरा नगर निगम चुनाव को टालने से इनकार कर दिया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि त्रिपुरा में अधिकारियों ने चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दलों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उसके आदेश का पालन नहीं किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में, बर्मन और साहा ने कहा कि “त्रिपुरा में कोई लोकतंत्र नहीं था” और लोगों से “राज्य में चल रही गुं’डागर्दी” और “सत्तारूढ़ दल के गुंडों” की ध’मकियों के खिलाफ वोट करने का आग्रह किया।

उन्होंने पूछा, “हमें समझ में नहीं आता कि नगर निकाय चुनाव जीतने के लिए इतनी हिं’सा क्यों है?” उन्होने कहा, अगर बीजेपी ने अपने 44 महीने के कार्यकाल में इतना विकास किया है तो चुनाव जीतने के लिए इतनी हिं’सा क्यों? बर्मन ने कहा कि पहले भी राज्य में कई मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन देब एक “अपवाद” हैं जो किसी भी “राजनीतिक व्याकरण” का पालन नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा, “आज भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं का मानना ​​है कि ये गुं’डे [हिं’सा में लिप्त] भाजपा और राष्ट्रीय नेताओं के लिए बदनामी कर रहे हैं।” विकास जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने के बजाय व्यक्तिगत हमले और चरित्र हनन हो रहे हैं। इसमें कहा गया है कि पैराट्रूपर नेता मानसिक रूप से विकृत है।”

बर्मन ने कहा कि पुलिस भी लोगों की जान बचाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, “राज्य भर में उस वर्ग के लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिं’सा हुई है, जिन्होंने कभी अपनी जान जोखिम में डालकर कम्युनिस्टों को हटाने और भाजपा को सत्ता में लाने के लिए अपना पैसा खर्च किया।”

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