वानखेड़े के खिलाफ नवाब मलिक के आरोपों को ‘पूरी तरह से झूठे’ नहीं कहे जा सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को नारको’टिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के बारे में सार्वजनिक बयान देने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। इस दौरान  न्यायमूर्ति माधव जामदार ने अपने आदेश में कहा, “प्रथम चरण में, यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।” उन्होंने कहा कि मलिक ने वानखेड़े के खिलाफ प्रासंगिक मुद्दे उठाए हैं।

अदालत ने कहा कि निजता के अधिकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। आम जनता को आधिकारिक क्षमता में किसी व्यक्ति के कार्यों के बारे में टिप्पणी करने का अधिकार है। यह भी देखा गया कि वानखेड़े के खिलाफ आर्यन खान मामले के पंच गवाह प्रभाकर सेल द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, अदालत ने कहा कि मलिक को वानखेड़े के खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक करने से पहले उन्हें सत्यापित करने के लिए उचित सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत ने स्वीकार किया कि मलिक के मीडिया बयान कथित तौर पर “द्वे’ष और दुश्मनी’ से प्रेरित” थे। क्योंकि वे 14 अक्टूबर को उनके दामाद को जमानत मिलने के बाद सामने आने लगे। जिसे पहले ड्र’ग्स के मामले में गिरफ्ता’र किया गया था। हालांकि, इसने यह कहते हुए निषेधाज्ञा आदेश पारित करने से इनकार कर दिया कि आरोपों को प्रथम दृष्टया पूरी तरह से झूठा नहीं कहा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि अदालत नवाब मलिक के खिलाफ समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई कर रही थी। मलिक ने आरोप लगाया है कि समीर वानखेड़े ने अपने मुस्लिम नाम को बदला और आरक्षण का लाभ उठाने के लिए अपना धर्म बदल लिया। उन्होंने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए वानखेड़े से जुड़े कई दस्तावेज साझा किए हैं।

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