कनाडा लगाने जा रहा हिंदू धर्म के प्रतीक स्वास्तिक पर प्रतिबंध, भारत ने जताई चिंता

कनाडा की सरकार ने हिंदू धर्म के प्रतीक स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर दी है। दरअसल कनाडा ने स्वास्तिक को नाजीवाद से जोड़ प्र्तिबंध का फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार, पिछले हफ्ते नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद पीटर जूलियन ने स्वास्तिक पर प्रतिबंध का एक निजी विधेयक पेश किया है। जिसे पार्टी नेता जगमीत सिंह का समर्थन प्राप्त है।

ये बिल  “नाजी स्वस्तिक और कू क्लक्स क्लान के प्रतीक चिन्ह जैसे प्रतीकों या प्रतीकों के प्रदर्शन या बिक्री को रोकने का प्रयास करता है। प्रतिबंध का प्रस्ताव ऐसे समय में आया जब बीते दिनों ट्रक ड्राइवरों ने सीमा पार आने पर वैक्सीन की अनिवार्यता का विरोध किया है, इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कनाडा की राजधानी ओटावा की घेराबंदी की।

इस संबंध में एक याचिका को बढ़ावा देते हुए सिंह ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि हम अपने समुदायों को सभी के लिए सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी लेते हैं – यह कनाडा में नफरत के प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाने का समय है। उन्होने कहा, “स्वास्तिक और संघ के झंडे का कनाडा में कोई स्थान नहीं है।”

भारत के महावाणिज्य दूत अपूर्व श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने “औपचारिक रूप से इस मुद्दे को कनाडा सरकार के सामने रखा है और इस संबंध में कनाडाई समूहों से प्राप्त याचिकाओं को उनके साथ साझा किया है”।

ट्रूडो की लिबरल पार्टी के कनाडाई सांसद चंद्र आर्य इस मामले को हाउस ऑफ कॉमन्स में उठा सकते हैं। उनके कार्यालय ने कहा कि वह “हिंदू पवित्र प्रतीक स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर बहुत चिंतित थे। ऐसा होने से रोकने के लिए वह पहल कर रहे हैं।” शर्मा ने यह भी कहा कि विधेयक का विरोध करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा क्योंकि यह “स्वस्तिक को अपराधीकरण” करेगा।

उन्होंने कहा कि अगर यह कानून बन जाता है, तो यह व्यक्तियों और यहां तक ​​कि कनाडाई बौद्ध संघ जैसे संगठनों के लिए भी समस्या पैदा कर सकता है, जो टोरंटो में अपने मंदिर के प्रवेश द्वार पर प्रतीक की पंक्तियों को प्रमुखता से प्रदर्शित करता है।

ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में इंडो-कैनेडियन बिल के खिलाफ एक रैली भी आयोजित की गई। बर्नबाई में हिंदू मंदिर और कनाडा की गुरुकुल सांस्कृतिक सोसायटी सहित संगठनों ने पिछले रविवार को विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

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