मोदी सरकार का बड़ा कमाल – 40 साल के इतिहास में पहली बार विकास दर माइनस 7.3%

देश को अमरीका से भी आगे ले जाने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था का बट्टा निकाल दिया है। 40 साल के इतिहास में पहली बार देश की विकास दर लुढ़ कर माइनस -7.3 % पर आ गई है। इससे पहले 1979-80 में विकास दर माइनस में आई थी। हालांकि उस समय भी माइनस 5.2 फीसदी विकास दर दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार ये उससे भी नीचे जा चुकी है।

सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान 1.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि पूरे वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 7.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।  हालांकि, जनवरी-मार्च 2021 के दौरान वृद्धि दर इससे पिछली तिमाही अक्टूबर-दिसंबर 2020 के 0.5 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले बेहतर थी।

पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था के आकार का अनुमान 38.96 लाख करोड़ रुपए रहा है। एक साल पहले इसी समय में यह 38.33 लाख करोड़ रुपए थी। सालाना आधार पर इसका अनुमान 135.13 लाख करोड़ रुपए लगाया गया है, जबकि एक साल पहले यह 145.6 लाख करोड़ रुपए थी। चौथी तिमाही में जीडीपी में कृषि की विकास दर 4.3 फीसदी रही है। एक साल पहले इसी अवधि में यह इतनी ही थी। निर्माण क्षेत्र में चौथी तिमाही में 14.5 फीसदी की विकास रही, जबकि बिजली, पानी, गैस और दूसरी सुविधाओं की विकास दर 9.1 फीसदी रही है।

इसके अलावा  2020-21 के लिए भारत का संघीय राजकोषीय घाटा 18.21 लाख करोड़ रुपए (251 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया। ये देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 9.3% है। फरवरी 2020 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 7.96 लाख करोड़ रखा था। यह जीडीपी का 3.50 फीसदी था।

उल्लेखनीय है कि इस साल जनवरी में जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में मार्च 2022 में समाप्त होने वाले मौजूदा वित्तीय वर्ष में 11 फीसदी की आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाया गया था।

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