एलआईसी आईपीओ टाइमिंग को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस ने मंगलवार को जीवन बीमा निगम के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को लेकर सरकार के आगे बढ़ने के तरीके पर सवाल उठाया, खासकर समय और मूल्यांकन अनुमानों में कटौती पर। पार्टी ने तर्क दिया कि बाजार की स्थितियां अनुकूल नहीं हैं और एलआईसी के मूल्यांकन और इश्यू के आकार को कम करने का सरकार का निर्णय हैरान करने वाला है।

कांग्रेस ने कहा कि उसे आईपीओ से कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि यह मोदी सरकार की विनिवेश नीति का हिस्सा है। “हमें इसका विरोध नहीं है। यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ है। हम यह भी जानते हैं, लेकिन मंशा, उद्देश्य, और तौर-तरीके … एलआईसी आईपीओ को सूचीबद्ध करने के लिए सरकार की हताशा, कम मूल्यांकन के बावजूद, प्रमुख मूल्यांकन सूचकांकों को ध्यान में रखते हुए, वैश्विक अनिश्चितताओं और एक अस्थिर बाजार में गहराई से पेचीदा और अत्यधिक संदिग्ध है, बस यही हमारी आपत्ति है।”

उन्होंने कहा, कांग्रेस ने सरकार से चार सवाल किए. “फरवरी 2022 में 12-14 लाख करोड़ रुपये का एलआईसी मूल्यांकन सिर्फ दो महीनों में 6 लाख करोड़ रुपये क्यों हो गया?… कई विशेषज्ञों ने कहा है कि एलआईसी के शेयर अब अत्यधिक कम मूल्य के हैं। इस मेगा आईपीओ के लिए फरवरी 2022 में प्रॉस्पेक्टस दाखिल करते समय, एलआईसी विनिवेश का लक्ष्य एम्बेडेड मूल्य का 2.5 गुना था … अब मूल्यांकन को घटाकर 1.1 गुना कर दिया गया है।”

सुरजेवाला ने कहा, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस एम्बेडेड वैल्यू के 3.9 गुना पर ट्रेड कर रहा है, एसबीआई लाइफ एम्बेडेड वैल्यू के 3.2 गुना पर ट्रेड कर रहा है और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ एम्बेडेड वैल्यू के 2.5 गुना पर ट्रेड कर रहा है, लेकिन एलआईसी के लिए, आपने एम्बेडेड वैल्यू 1.1 पर रखी है,

दूसरे, उन्होंने कहा, “जनवरी-फरवरी 2022 से, एलआईसी के शेयर की कीमत लगभग 1,100 रुपये प्रति शेयर से घटाकर 902-949 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड में कर दी गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एम्बेडेड वैल्यू में इस कमी और प्राइस बैंड को कम करने से सरकारी खजाने को 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

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