CMIE रिपोर्ट : नवंबर में शहरों में बढ़ी बेरोजगारी दर, 7.21% से बढ़कर हुई 8%

कांग्रेस के अध्यक्ष खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को जॉब लेटर थमाने को ‘चुनावी स्टंट’ बताया था। शायद खड़गे सही ही कह रहे थे।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘रोज़गार मेले’ आयोजित किए जाने के बावजूद देश में बेरोज़गारी दर बढ़ती जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की ताज़ा रिपोर्ट ने भाजपा सरकार के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

CMIE के अनुसार नवंबर में देश की बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत हो गई है। ये पिछले तीन महीने में सबसे ज्यादा है। इस रिपोर्ट के अनुसार शहरों में पिछले महीने बेरोज़गारी दर 7.21 प्रतिशत थी। लेकिन अब वही बढ़कर 8.96 प्रतिशत हो गई है। हालाँकि, ग्रामीण इलाकों में यही दर 8.04 प्रतिशत से घटकर 7.55 प्रतिशत हो गई है।

इसका मतलब शहरों में ज़्यादा लोग बेरोज़गार हो रहे हैं, शहरी नौकरियों की स्थिति खराब है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर आ रही आर्थिक मंदी के कारण हालात और भी ज़्यादा अप्रिय हो सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात है कि पीएम रोज़गार मेले आयोजित कर नौकरियां बांटने की बात कर रहे हैं। लेकिन ये नौकरियां बाँटने के लिए उनके पास कई मौके थे। चुनाव से पहले वादे किए जा रहे हैं। लेकिन जिन राज्यों में चुनाव हैं उनमें से कुछ में तो भाजपा की ही सरकार है। डबल इंजीन सरकार के बावजूद इतने सालों में बेरोज़गारी के आंकड़ों को संभाला नहीं जा सका।

CMIE क्या है?
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) एक निजी थिंक टैंक है जो आर्थिक मसलों पर अपनी रिपोर्ट जारी करता है। इसके रोज़गार के डेटा पर तमाम लोगों की नज़र होती है। सरकार अपने खुद के मासिक आंकड़े जारी नहीं करती है।

भाजपा के वादे खोखले?
चुनावों में भाजपा द्वारा रोज़गार के तमाम वादे किए जाते हैं। 2014 लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने भाजपा के सत्ता में आने पर एक करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था।

2019 लोक सभा चुनाव में भी भाजपा ने युवाओं के लिए बेहतर अवसर देने का वादा किया था, नई नौकरियां लाने का वादा किया था। ऐसे ही छोटे-मोटे वादे विधानसभा चुनावों में भी किए जाते हैं। अगर वादों को निभाया जाता तो ऐसे आंकड़ें न आते।
कथित ‘मज़बूत सरकार’ बनाने के बावजूद बढ़ती बेरोज़गारी के आंकड़ों को समझा पाना सरकार के लिए मुश्किल है। अगर कुछ लोग नौकरी पा भी जा रहे हैं, तब भी बढ़ती बेरोज़गारी दर से हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

साभार: बोलता हिदुस्तान

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