रवीश कुमार जब तक विपक्ष अपनी सभाओं के मंच से अख़बार फाड़ो आंदोलन शुरू नहीं करेगा तब तक जनता नहीं समझ पाएगी कि चुनाव के समय अख़बार और न्यूज़ चैनल […]

रवीश कुमार दहाड़ का इस्तेमाल किया है कि आज की राजनीति की भाषा भी गर्जना, शंखनाद और दहाड़ की हो गई है तो दहाड़ ही सही। पाँच दिन टूट कर

रवीश कुमार: मेरी भर्ती-मेरी परीक्षा और उम्मीदों के सैलाब के बीच मेरी दहाड़Read More »

रवीश कुमार प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक को लेकर बीजेपी की प्रतिक्रिया और मीडिया के डिबेट दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। ऐसा लगता है कि सूरक्षा में चूक का

रवीश कुमार: सुरक्षा की चूक कहीं कवरेज की भूख मिटाने का प्रयोजन तो नहीं है, आधिकारिक बयान कहां हैं?Read More »

रवीश कुमार फ़्लैशबैक में जाकर ख़बरों को पढ़ा कीजिए। हर साल हेडलाइन छपती रही कि सीएम योगी ने एक लाख भर्ती करने का प्लान बनाया तो इस साल दो लाख

रवीश कुमार: ‘यूपी में हर साल लाखों नौकरियों की हेडलाइन ख़ूब छपी, मिली किसे है, पता नहीं’Read More »

खान अब्दुल गफ्फार खान हमेशा अपने साथ एक कपड़े की गठरी (थैला) रखते थे जिसे वह किसी को नही सौपते थे गांधी जी अक्सर उनसे मज़ाक किया करते थे की

जब सीमांत गांधी से बोली थी इंदिरा गांधी – बस यही पोटली तो बची है इसे भी आप ले…..Read More »

द हिन्दू में छपी आर प्रसाद की इस रिपोर्ट को आप ध्यान से पढ़ सकते हैं बशर्ते धर्म की राजनीति से थोड़ा अलग हट कर सोचने का वक्त हो और

रवीश कुमार: क्या बोगस आधार पर बूस्टर डोज़ देने का फै़सला हुआ है?Read More »

मोहम्मद राशिद यूसुफ़ जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीयों पर जुल्म की इंतेहा कर दी थी तभी भगतसिंह, चंद्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्ला खां और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे हजारों क्रांतिकारीयो ने

आजादी के लिए जान देने वाले भारत के दूसरे भगत सिंह यानि सफ़दर हाशमी को आप भूल तो नहीं गए?Read More »