मुस्लिमों और ईसाइयो के खिलाफ दिये बयान को बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने लिया वापस

बेंगलुरु दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद  तेजस्वी सूर्या ने सोमवार को कहा कि वह धर्म की रक्षा और समीक्षा करने के तरीके के रूप में हिंदू धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित लोगों की ‘घर वापसी’ पर अपनी टिप्पणी को बिना शर्त वापस ले रहे हैं।

सूर्या ने ट्वीट किया, “दो दिन पहले उडुपी श्रीकृष्ण मठ में आयोजित एक कार्यक्रम में, मैंने ‘भारत में हिंदू पुनरुद्धार’ विषय पर बात की थी। मेरे भाषण के कुछ बयानों ने खेदजनक रूप से एक परिहार्य विवाद पैदा कर दिया है। इसलिए मैं बिना शर्त बयान वापस लेता हूं।”

हालांकि, भाजपा नेता ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांगी, जिसकी विपक्ष ने मांग की थी।

उडुपी कृष्ण मठ में शनिवार को बोलते हुए, युवा सांसद ने कहा, “वे लोग जिन्होंने अपने मातृ धर्म को छोड़ दिया है और पूरे भारत के इतिहास में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों से हैं। जो लोग हिंदू धर्म से बाहर चले गए हैं, उन्हें पूरी तरह से वापस लाया जाना चाहिए, मातृ आस्था, हिंदू धर्म में वापस लाया जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे अन्य धर्मों के विचारों पर हमला किया। “ईसाई धर्म और इस्लाम केवल धर्म नहीं हैं। वे राजनीतिक साम्राज्यवादी विचारधाराएं हैं और हिंदुओं को इसे समझना चाहिए।” उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए यह समझना आवश्यक है कि “उनके दुश्मन कौन हैं”। उन्होंने कहा, “पहली चीज़ जो हमें करने की ज़रूरत है, यह पहचानें कि कौन हमारे धर्म को धरती से मिटाने की कोशिश कर रहा है। यह हिंदू धर्म और हिंदू जाति के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।”

बयान ऐसे समय में आया हैं जब कर्नाटक में ईसाई समुदाय के खिलाफ हमले हुए हैं। साथ ही बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में विवादास्पद कानूनों को लागू करने की कोशिश कर रही है। इनमें हाल ही में लाया गया धर्मांतरण विरोधी कानून, मवेशी वध विरोधी कानून और विशेष विवाह अधिनियम या जिसे दक्षिणपंथी ‘लव जिहाद’ कहते हैं, शामिल हैं।

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