कश्मीरी पंडितों पर घिरी केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, फिल्ममेकर ने सुना दी खरी-खरी

कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के सबंध में दिये गए बयान को लेकर मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी बुरी तरह से घिर चुकी है। उनके इस बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। इस मामले में अब फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भी अपनी भड़ास निकाली। उन्होने कहा कि दुनिया भर के 7 लाख कश्मीरी पंडित आपकी माफी का इंतज़ार कर रहे है।

बता दें कि घाटी में लौटने में विफलता के लिए मीनाक्षी लेखी ने कश्मीरी पंडितों को दोषी ठहराया था। उन्होने उनकी स्थिति की तुलना उन प्रवासी मजदूरों से की जो महामारी की पहली लहर के दौरान घर जाने के बाद अपने काम पर लौट आए थे। दरअसल उनसे एक कार्यक्रम में सवाल किया गया था कि “अपनी संस्कृति को बचाने” के लिए कश्मीर में उनका पुनर्वास कब किया जाएगा।

इस पर उन्होने कहा, मैं वास्तव में इस सवाल पर हैरान हूं क्योंकि एक व्यक्ति के रूप में जो इस देश का हिस्सा है, आप जहां भी जाना चाहते हैं, वहां जाने के लिए स्वतंत्र हैं। लोगों को उनके घरों में वापस जाने से कोई नहीं रोक रहा है, और जो कुछ भी आवश्यक है वह प्रदान किया जाएगा।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “जब दिल्ली में कोरोना हुआ, तो बिहार, झारखंड और कहीं से भी बहुत सारे प्रवासी कामगार आए थे। वे यहां थे और दिल्ली सरकार ने उनके साथ जो भी व्यवहार किया, वे सभी वापस चले गए और वे सभी वापस आ गए। समस्या कहाँ हे? मुझे लगता है कि लोग वहां भी निर्णय लेते हैं जहां वे जाना चाहते हैं।”

इस दौरान एक पंडित प्रतिभागी ने पूछा कि क्या उनके लिए घाटी में लौटना संभव है। इस पर उन्होने कहा, मैं इस सवाल पर हैरान हूं क्योंकि जहां तक ​​सरकार का सवाल है, वह कश्मीर, बिहार या दिल्ली या कहीं भी भारत के लोगों के साथ है। कुछ पहल खुद लोगों से भी आने की जरूरत है। उन्होने ये भी कहा कि कई पंडितों को घाटी में लौटने में कोई दिलचस्पी नहीं।

“मुझे पता है कि बहुत सारे लोग हैं जो (देश में) बसे हुए हैं और वे अच्छी तरह से बसे हुए हैं। तो एक तरफ, उनका दिल अपने मूल निवास स्थान के लिए तड़प रहा होगा, लेकिन वे जहां भी रह रहे हैं, उससे बहुत खुश हैं। वे परेशान नहीं होना चाहते… लोगों को भी कुछ निजी पहल करने की जरूरत है।”

लेखी के इस बयान पर अशोक पंडित ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि ‘दुनिया भर में 7 लाख #KashmiriHindus अभी भी #मीनाक्षीलेखी से माफी का इंतजार कर रहे हैं। इस समुदाय का उपहास और अपमान किया गया है। हमारी कम्यूनिटी की ह’त्या, नरसं’हार, बला’त्कार हुआ, जो आतं’कवाद के पहले फ्रंटलाइन पीड़ित थे। हम आपके ऐसे एजेंडा के लिए पोस्टर के रूप में इस्तेमाल होने से इनकार करते हैं।’

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