हेट स्पीच मामलों में अकबरुद्दीन ओवैसी बरी, बीजेपी का आया बड़ा बयान

हैदराबाद: नामपल्ली मेट्रोपॉलिटन अदालतों में सांसद/विधायकों के लिए विशेष सत्र अदालत ने बुधवार को एआईएमआईएम के फ्लोर लीडर अकबरुद्दीन ओवैसी को निर्मल और निजामाबाद जिलों से जुड़े हेट स्पीच के दोनों मामलों में बरी कर दिया गया। दोनों निर्णयों के मद्देनजर, पुलिस ने नामपल्ली अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।

निर्मल हेट स्पीच केस:

इस पहले मामले में, वर्ष 2012 में अकबरुद्दीन ने एक भाषण दिया था, जिस पर निर्मल नगर पुलिस ने विधायक और निर्मल नगर पार्टी के अध्यक्ष अजीम बिन याहिया पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं 120-बी, 153-ए, 295 (ए) 298 और 188 के तहत मामला दर्ज किया था।

अदालत ने मामले में 38 गवाहों से पूछताछ की है और अभियोजन पक्ष ने ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग के संबंध में चंडीगढ़ एफएसएल से प्राप्त एक फोरेंसिक रिपोर्ट भी दायर की है।

निजामाबाद हेट स्पीच केस:

दूसरे मामले में, 2013 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने कथित तौर पर निजामाबाद में भड़काऊ भाषण दिया था, जिस पर Cr.No. 01/2013 आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए) के तहत निजामाबाद-द्वितीय टाउन पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था और 5 फरवरी, 2013 को, निजामाबाद जिले में द्वितीय अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी विधायक को 40 दिनों की कैद की अवधि के बाद सशर्त जमानत दी थी।

बाद में, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने सभी राज्य सरकारों को संसद सदस्यों और विधान सभाओं के सदस्यों के खिलाफ मुकदमे चलाने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए कहा। उसके बाद, ओवैसी के मामले को हैदराबाद की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। मामले की जांच राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने की थी। अदालत ने मामले में 30 गवाहों से पूछताछ की है।

विशेष सत्र अदालत ने विधायक के खिलाफ मामलों को साबित करने में अभियोजन पक्ष के विफल होने के बाद एआईएमआईएम के फ्लोर लीडर को दो मामलों में बरी कर दिया है। अकबरुद्दीन ओवैसी के वकील एमए अज़ीम ने कहा, “विधायक के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्हें बरी कर दिया गया।”

इस मामले में अब तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष और सांसद बंदी संजय कुमार ने बुधवार को कहा कि  अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ मामलों को दबा दिया गया है।

बंदी संजय कुमार ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए सत्तारूढ़ टीआरएस, ओवैसी की एआईएमआईएम और कांग्रेस के बीच मिलीभगत है। अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि लोग निश्चित रूप से इन तीनों पक्षों के लिए एक उपयुक्त उदाहरण पेश करेंगे।

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