रायपुर में धर्म संसद का आयोजन कांग्रेस और एनसीपी ने किया था: भाजपा

धार्मिक नेता कालीचरण महाराज को महात्मा गांधी को गाली देने के आरोप में गिर’फ्तार किए जाने और देशद्रोह का आरोप लगाने के एक दिन बाद, भाजपा ने शुक्रवार को कहा कि रायपुर में ‘धर्म संसद’ (धार्मिक मण्डली) के वास्तविक आयोजक कांग्रेस और एनसीपी नेता थे।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया कि सभी आयोजक कांग्रेस से जुड़े हैं और कुछ को राज्य में मंत्री का दर्जा प्राप्त है।

उन्होने कहा, “कांग्रेस के पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राम सुंदर दास आयोजकों में से एक थे। दास को कांग्रेस सरकार द्वारा मंत्री का दर्जा दिया गया है। प्रमोद दुबे रायपुर नगर निगम के अध्यक्ष हैं और विकास उपाध्याय संसदीय सचिव हैं। सभी प्रमुख लोग कांग्रेसी हैं। उन्होंने इस तरह का आयोजन करके भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ।

भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि ‘धर्म संसद’के असली आयोजक नीलकंठ त्रिपाठी जो राकांपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्होने ट्वीट कर कहा, “रायपुर में धर्म संसद को लेकर हमेशा की तरह भाजपा और अन्य हिंदू संगठनों को बदनाम किया जा रहा हैं। लेकिन वास्तविक आयोजक कौन है? एनसीपी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष नीलकंठ त्रिपाठी। आप देखिए, धर्मनिरपेक्षता में कट्टरता को ढकना सुविधाजनक है!, ”

मध्य प्रदेश से कालीचरण महाराज की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ दलों के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार पर “अंतर-राज्यीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन” करने का आरोप लगाया था।

मिश्रा ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) विवेक जौहरी को अंतरराज्यीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन के मामले में छत्तीसगढ़ DGP से बात करने का भी निर्देश दिया है। गुरुवार को छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम कालीचरण को मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिर’फ्तार कर रायपुर ले गई थी। कालीचरण को कांग्रेस नेता दुबे की शिकायत पर गि’रफ्तार किया गया था, जो धर्म संसद में भी शामिल हुए थे।

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