अब्बू के पास चॉकलेट खिलाने के पैसे नहीं थे, बेटी बन गई आईपीएस

राकेश चौरासिया / नई दिल्ली
असलम खान आईपीएस. पुरुष होने की चुगली करने वाला ये नाम, दरअसल एक महिला आईपीएस का है. जो इस वक्त गोवा पुलिस में बतौर डीआईजीपी तैनात हैं. असलम कहती हैं कि कभी उनके पिता के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो उन्हें जन्मदिन पर उन्हें चॉकलेट भी खिला पाते. तब रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया था. असलम ने जब यह दर्द सोशल मीडिया पर बयां किया, तो यूजर्स ने उन्हें दिल खोलकर ढेर सारी बधाईयों के साथ सकारात्मक प्रतिक्रियाओं से नवाजा.

असलम ने ट्वीट किया है, ‘‘पिताजी की आँखों की वो मयूसी नहीं भूलती और ना ही भूलते हैं उस वक्त के रिश्तेदार, जिन्होंने असली रंग दिखाए.’’ इसी के साथ उन्होंने एक पोस्टर टैग किया है, जिस पर लिखा है, ‘‘जब आईपीएस असलम खान के पिता के पास बेटी के जन्मदिन के अवसर पर चॉकलेट के लिए पैसा नहीं था.’’

जयपुर के ग्राम्य परिवेश से जुड़ीं असलम एक दबंग पुलिस अधिकारी के तौर पर जानी जाती हैं. असलम 2007 की आईपीएस बैच के अधिकारी हैं. वह बेदाग साख वाली एक सख्त पुलिस अधिकारी हैं, लेकिन साथ ही उनका दिल भी कोमल है. महिला आईपीएस अधिकारी ने जून 2018 से दिल्ली के पास लुटेरों द्वारा मारे गए एक सिख ट्रक ड्राइवर के परिवार को अपना आधा वेतन हर महीने दिया, जब उसने बिना किसी लाइमलाइट के अच्छे काम को अंजाम दिया. वे लगातार इस परिवार के संपर्क में हैं और बच्चों को तालीम दिलवा रही हैं.

असलम बेहद सख्त मिजाज भी हैं. उन्होंने 2014 में आठ सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. हालांकि इसके बाद उनका अंडमान से उनका स्थानांतरण हो गया था. अंडमान में पुलिस अधीक्षक (भ्रष्टाचार विरोधी) के रूप में तैनात खान ने अक्टूबर और नवंबर, 2013 में आठ सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन्होंने अक्टूबर में भी पोर्ट ब्लेयर नगरपालिका परिषद के चार अधिकारियों को अत्यधिक दरों पर बिजली के सामान खरीदने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्होंने रिश्वत लेने के आरोप में एक यातायात पुलिस उप निरीक्षक सहित और भी सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया.

साभार: आवाज द वॉइस

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