गरीबों की दिवाली अंधेरे में, 21 राज्यों के पास मनरेगा मजदूरों को देने के लिए पैसा नहीं

इस बार गरीब और मजदूर वर्ग की दिवाली फीकी मनने वाली है। दरअसल, 21 राज्यों में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पाएगी। दरअसल, 21 राज्यों के पास मनरेगा मजदूरों को मजदूरी देने के लिए फंड ही खत्म हो गया। जिससे लाखों-करोड़ो मजदूरों को दिवाली पर मजदूरी नहीं मिल पाएगी।

मनरेगा में फंड की कमी को लेकर अब मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर है। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव बल्लभ ने मनरेगा में फंड की कमी से जुड़े खबर को शेयर करते हुए लिखा कि शुभ प्रभात, 2021-22 वित्तीय वर्ष में 21 राज्यों ने मनरेगा के तहत आवंटित की गई राशि पूरी खर्च कर ली है। यह करोड़ों मनरेगा श्रमिकों के लिए बेगार है और वह भी त्योहार के मौसम के दौरान।

हालांकि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार कार्यक्रम के उचित कार्यान्वयन के लिए मजदूरी और सामग्री भुगतान के लिए धन जारी करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने कहा कि जब भी अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है, वित्त मंत्रालय से इसे उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाता है।

बता दें कि मनरेगा को यूपीए सरकार ने लांच किया था। इसके तहत बेरोजगारों को  साल भर में कम से कम 100 दिन का रोज़गार दिया जाता है। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने इसे 1.11 लाख करोड़ का बजट दिया था और इस योजना से रिकॉर्ड 11 करोड़ लोगों को सहारा मिला था। लेकिन 2021-22 में इसका बजट घटाकर 73,000 करोड़ रुपये कर दिया गया।

पीपुल्स ऐक्शन फार इंप्लाइमेंट गारंटी (पीएईजी) कार्यकारी समूह के सदस्य निखिल डे का कहना है कि कोरोना महामारी के साथ साथ लॉकडाउन की वजह से देश भर के श्रमिकों पर अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है। पिछले साल पहली लहर के दौरान लाखों ग्रामीण गरीबों ने मनरेगा की ओर रुख किया क्योंकि यह बुनियादी आय सुरक्षा का एकमात्र स्रोत था।

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